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हजारों हैं मेरे अल्फाज के दिवाने

Monday, 7 December 2015

[1] हजारों हैं मेरे अल्फाज के दिवाने... मेरी खामोशी सुनने वाला कोई होता तो क्या बात थी...!!! [3] वो तो आँखे थी जो सब सच बयाँ कर गयी... ...
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ये तो शौक है मेरा, दर्द को अल्फाज़ो मे बयां करने का

[1] ये तो शौक है मेरा, दर्द को अल्फाज़ो मे बयां करने का... नादान लोग हमे युं ही शायर समझ लेते है...!!! [2] वो साथ थे तो एक लफ़्ज़ ना निकल...
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ग़लती ज़िन्दगी का एक पन्ना है

Saturday, 22 August 2015

[1] जब सवालों के जवाब मिलने बंद हो जायें, तो समझ लो एक मोड़ लेना है, रास्ते और रिश्ते दोनों में!! [2] दुआ करो वो सिर्फ हमारे ही रहे, क्...
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मत पूछो उसके प्यार करने का अंदाज़ कैसा था

[1] चुपके से गुजार देंगे ज़िन्दगी नाम तेरे, लोगो को बताएंगे फिर प्यार ऐसे भी होता है!! [2] मत पूछो उसके प्यार करने का अन्दाज कैसा था, उसन...
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तेरा शुक्रगुज़ार हूं रब इन रूसवाईयों के लिए

Wednesday, 19 August 2015

[1] तेरा शुक्रगुज़ार हूं रब इन रूसवाईयों के लिए.. ये ना होती तो शायद तुझे मै याद भी ना करता!! [2] वो अक्सर हमे कहते है कि तुम रंग बदलते...
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जिसको देखा नही उसे सब खुदा कहते है

"रब" ने नवाजा  हमें जिंदगी देकर, और हम "शौहरत" मांगते  रह  गये। जिंदगी गुजार दी शौहरत के पीछे, फिर जीने की "मौहल...
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वो एक ख्वाब था

वो एक ख्वाब था उसके लिए एक ऐसा ख़्वाब जिससे हकीकत में मिलना न वो चाहती थी और न ख़्वाब ही इसकी इजाजत देता था। ख्वाब में उससे मिलना बतियाना सीधे...
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थक जाओ जब दुनिया की महफ़िलो से

[1] मैं ज़िन्दगी गिरवी रख दूंगा.. तू क़ीमत बता मुस्कुराने की..!! [2] थक जाओ जब दुनिया की महफिलो से.. तो आवाज लगा देना.. हम आज भी अकेले...
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लिख देना ये अल्फाज मेरी कब्र पर

[1] लिख देना ये अल्फाज मेरी कब्र पर... की मौत अच्छी है मगर दिल का लगाना अच्छा नहीं...!! [2] मेरे अल्फ़ाज़ ही है मेरे दर्द का मरहम.. मैं...
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उस पर अल्फाजो का क्या असर होगा

[1] महोब्बत की कश्ती में सोच समज कर सवार होना मेरे दोस्त.. जब ये चलती है तो किनारा नहीं मिलता और जब डूबती है तो सहारा नहीं मिलता..।। [2] ...
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छु जाते हो तुम मुझे कितनी ही दफा ख्वाब बनकर

[1] छु जाते हो तुम मुझे कितनी ही दफा ख्वाब बनकर.. ये दुनिया तो खामखा कहती है कि तुम मेरे करीब नहीं.!!! [2] चाँद की रातों मे सारा जहाँ ...
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क़द्र कर अपने चाहने वालो की

[1] थक जाओ जब दुनिया की महफिलो से, तो आवाज लगा देना, हम आज भी अकेले ही रहते हैं। [2] बार बार रफू करता रहता हूँ जिन्दगी की जेब.. कम्बखत...
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मुकम्मल इश्क़ तो इबादत है

[1] शिकवा करने गये थे  और इबादत सी हो गई.. तुझे भुलाने की ज़िद थी, मगर तेरी आदत सी हो गई..!!❤ [2] ना पीने का शौक था, ना पिलाने का शौक थ...
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खवाहिश नही मुझे मशहुर होने की।

खवाहिश  नही  मुझे  मशहुर  होने  की। आप  मुझे  पहचानते  हो  बस  इतना  ही  काफी  है। अच्छे  ने  अच्छा  और  बुरे  ने  बुरा  जाना  मुझे। क्यो...
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खैरात में तो तेरी मोहब्बत भी मंजूर नहीं

[1] उतारे जो ज़िंदगी,गहराइयों मेँ हम। महफ़िल मेँ रह के भी,रहे तनहाइयों मेँ हम। दीवानगी नहीँ तो और क्या कहे..? इंसान ढूंढते रहे परछाइयों ...
 
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