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थक जाओ जब दुनिया की महफ़िलो से

Wednesday, 19 August 2015

[1]
मैं ज़िन्दगी गिरवी रख दूंगा..
तू क़ीमत बता मुस्कुराने की..!!

[2]
थक जाओ जब दुनिया की महफिलो से..
तो आवाज लगा देना..
हम आज भी अकेले ही रहते हैं..!!

[3]
मुझको पढ़ना हो तो मेरी शायरी पढ़ लो
लफ्ज बेमिसाल न सही...
जज्बात लाजवाब होंगे..!!

[4]
परदा तो शर्म का होता है..
वरना इशारे तो घूँघट में भी होते है..!!

[5]
सजा ये है के 'बंजर' जमीन हूँ अब..
जुर्म ये है कि 'बारिशों' से इश्क किया मेंने..!!

[6]
वो सुना रहे थे अपनी वफाओ के किस्से..
हम पर नज़र पड़ी तो खामोश हो गए..!!

[7]
मुझे आज भी उसकी बेपनाह मोहब्ब्त
रोने नहीं देती..
जो कभी कहती थी..
पागल मेरी जान निकल जायेगी..
अगर तेरे आँसू गिरे तो..!!

[8]
चंद फाँसले हों दरमियाँ ये भी लाज़मी है..
डरता हूँ अगर नज़दीकियाँ बढ़ गई तो..
कहीं मोहब्बत ना हो जाए शख़्सियत से तेरी..!!

[9]
मत पूछो कैसे गुजरता है हर पल तुम्हारे बिना..
कभी बात करने की हसरत कभी देखने की तमन्ना..!!

[10]
तलाश कर मेरी कमी को अपने दिल में..
दर्द हो तो समझ लेना की रिश्ता अभी बाकी है..!!

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