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मुकम्मल इश्क़ तो इबादत है

Wednesday, 19 August 2015

[1]
शिकवा करने गये थे 
और इबादत सी हो गई..
तुझे भुलाने की ज़िद थी,
मगर तेरी आदत सी हो गई..!!❤

[2]
ना पीने का शौक था, ना पिलाने का शौक था,
हमे तो सिर्फ नझर मिलाने का शौक था,
पर क्या करे यारो, हम नझर ही उनसे मिला बैठे,
जिन्हे; सिर्फ; नझरो से पिलाने का शौक था !!

[3]
अल्फाज किसी और के मैं लाता ज़रूर हूँ
पर गहराईयां समंदर सी मेरे दिल की हैं जनाब।

[4]
आंसू मेरे थम जाएँ तो फिर  शौक़ से जाना।
ऐसे में कहाँ जाओगे आगे बरसात बहुत है।

[5]
वफ़ा-फ़रेब पाना-खोना, ये सब नादानियाँ तो है,
मुकम्मल इश्क़ तो इबादत है ,बस करते जाना है.

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