[1]
लिख देना ये अल्फाज मेरी कब्र पर...
की मौत अच्छी है मगर दिल का लगाना अच्छा नहीं...!!
[2]
मेरे अल्फ़ाज़ ही है मेरे दर्द का मरहम..
मैं शायर ना होता तो पागल होता..!!
[3]
मंजिल तो हांसिल कर ही लेंगे कहीं किसी रोज..
ठोकरें ज़हर तो नहीं जो खा के मर जाएँ..!!
[4]
यूं ना खींचो मुझे अपनी तरफ बेबस
कर के...
कहीं ऐसा ना हो कि..
खुद से भी बिछड़ जाऊं और तुम भी
ना मिलो..!!
[5]
कुछ वक़्त की रवानी ने हमे यूँ बदल दिया..
वफ़ा पर अब भी कायम है मगर मोहब्बत कुछ रास नहीं आती..!!

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