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ये तो शौक है मेरा, दर्द को अल्फाज़ो मे बयां करने का

Monday, 7 December 2015

[1]
ये तो शौक है मेरा, दर्द को अल्फाज़ो मे बयां करने का...
नादान लोग हमे युं ही शायर समझ लेते है...!!!

[2]
वो साथ थे तो एक लफ़्ज़ ना निकला लबों से...
दूर क्या हुए कलम ने क़हर मचा दिया...!!!

[3]
कहाँ मांगी थी कायनात जो इतनी मुश्किल हुई अये खुदा...
सिसकते हुवे होंठों से एक शख्स ही तो माँगा था...!!!

[4]
कहते थे हम नही रह सकते तुम्हारे बिना...
हम दोनो रह गये वो वादा ना रहा...!!!

[5]
तुझे दूर जाना है तो बेशक़ जा मगर याद रखना...
मुड़ कर देखने की आदत हमे भी नही...!!!

[6]
तेरा हर अंदाज हमे अच्छा लगता है...
सिवाय नजर अंदाज करने के...!!!

[7]
तुम खुद उलझ जाओगे, मुझे गम देने की चाहत में...
मुझमें हौसला बहूत है, मुस्कुराकर निकल जाऊगा...!!!

[8]
जो लिख दिया हमने वो औरों को मंजूर हो रहा है...
हम नहीं हमारे लफ्ज़ ही सही, कुछ तो मश्हूर हो रहा है...!!!

[9]
जो दिल को अच्छा लगता है...
उसी को अपना कहता हूँ...
मुऩाफा देखकर रिश्तो की सियासत नहीं करता...!!!

[10]
होंठो के दरमियाँ रह गयी कुछ अनकही बातें...
वो समझते हैं मुझे उनसे शिकवा कोई ना था...!!!

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