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तेरा शुक्रगुज़ार हूं रब इन रूसवाईयों के लिए

Wednesday, 19 August 2015

[1]
तेरा शुक्रगुज़ार हूं रब इन रूसवाईयों के लिए..
ये ना होती तो शायद तुझे मै याद भी ना करता!!

[2]
वो अक्सर हमे कहते है कि
तुम रंग बदलते हो..
पर उन्हे कौन समझाए कि
टूटे हुए पत्तों का रंग बदल ही जाता है!!

[3]
होकर मायुस ना यु शाम की तरह ढलते रहिएे,
जिंदगी एक भोर हैं सुरज की तरह निकलते रहिऐ,
ठहरोगे एक पांव पर तो थक जाओगे,
धीरे धीरे ही सही मगर राह पर चलते रहिए!!

[4]
कुछ पाबंदी भी लाज़मी है दिल्लगी के लिए,
किसी से इश्क़ अगर हो तो बेपनाह न हो!!

[5]
कुछ वक़्त की रवानी ने हमे यूँ बदल दिया,
वफ़ा पर अब भी कायम है मगर मोहब्बत
कुछ रास नहीं आती!!

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