Pages

छु जाते हो तुम मुझे कितनी ही दफा ख्वाब बनकर

Wednesday, 19 August 2015

[1]
छु जाते हो तुम मुझे कितनी ही दफा
ख्वाब बनकर..
ये दुनिया तो खामखा कहती है
कि तुम मेरे करीब नहीं.!!!

[2]
चाँद की रातों मे सारा जहाँ सोता है,
किसी की यादो मे कोई बदनसीब रोता है,
खुदा किसी को मोहब्बत पे फिदा ना करे,
अगर करे तो किसी को जुदा ना करे।।

[3]
बगैर जाने-पहचाने इक़रार ना कीजिये,
मुस्कुरा कर यूँ दिलों को बेक़रार ना कीजिये,
फूल भी दे जाते हैं ज़ख़्म गहरे कभी-कभी,
हर फूल पर यूँ ऐतबार ना कीजिये।।।

[4]
कोई नही आयेगा मेरी जिदंगी मे तुम्हारे सिवा,
एक मौत ही है जिसका मैं वादा नही करता.।।

[5]
चाँद निकलेगा तो दुआ मांगेंगे,
अपने हिस्से में मुकदर का लिखा मांगेंगे,
हम तलबगार नहीं दुनिया और दौलत के,
हम रब से सिर्फ आपकी वफ़ा मांगेंगे।।

Subscribe your email address now to get the latest articles from us

No comments:

Post a Comment

 
Copyright © 2015. मेरे अल्फ़ाज़.
Creative Commons License