[1] हजारों हैं मेरे अल्फाज के दिवाने... मेरी खामोशी सुनने वाला कोई होता तो क्या बात थी...!!! [3] वो तो आँखे थी जो सब सच बयाँ कर गयी... ...
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ये तो शौक है मेरा, दर्द को अल्फाज़ो मे बयां करने का
[1] ये तो शौक है मेरा, दर्द को अल्फाज़ो मे बयां करने का... नादान लोग हमे युं ही शायर समझ लेते है...!!! [2] वो साथ थे तो एक लफ़्ज़ ना निकल...
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